कृष्ण सेवा में तुलसी इतनी ज़रूरी क्यों है
भोग में तुलसी पत्र, तुलसी की माला, और कार्तिक मास से तुलसी का संबंध।
अपडेट: 25 Oct 2026
वैष्णव परंपरा में तुलसी साधारण पौधा नहीं है। कहा जाता है कि तुलसी पत्र के बिना कृष्ण को लगाया गया भोग पूर्ण नहीं होता, इसीलिए भोग की थाली में एक तुलसी पत्र रखने की रीत है।
वृंदावन के नाम से भी तुलसी जुड़ी है। बहुत लोग "वृंदा" को तुलसी का एक नाम मानते हैं और "वन" का अर्थ जंगल है, इस तरह वृंदावन यानी तुलसी का वन।
तुलसी की माला
कई वैष्णव गले में तुलसी की लकड़ी की माला पहनते हैं। यह मुख्यतः नियम निभाने और स्वयं को याद दिलाने के लिए है, कोई जादू-टोना नहीं। जप के लिए भी तुलसी की माला का प्रयोग होता है।
कार्तिक मास और तुलसी विवाह
कार्तिक मास में तुलसी की सेवा विशेष रूप से की जाती है। हर शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने की रीत है। कार्तिक के शुक्ल पक्ष में तुलसी विवाह होता है, जिसमें तुलसी का विवाह शालिग्राम शिला या विष्णु जी से कराया जाता है।
घर में तुलसी हो तो रोज़ जल दें और पत्ता तोड़ने से पहले प्रणाम करें। बहुत से परिवार बस इतना ही करते हैं।