शरद पूर्णिमा: रास लीला और चाँदनी में खीर
आश्विन पूर्णिमा की रात कृष्ण के महारास की कथा और चाँदनी में खीर रखने की प्रचलित रीत।
अपडेट: 25 Oct 2026
आश्विन मास की पूर्णिमा शरद पूर्णिमा है। भागवत पुराण की कथा के अनुसार इसी रात वृंदावन में कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था। शरद का आकाश साफ़ होता है और चंद्रमा सबसे उज्ज्वल।
कई परिवारों में इस रात दूध की खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चाँदनी में रखी जाती है। सुबह उसे ठाकुर जी को अर्पित कर प्रसाद के रूप में खाया जाता है। कुछ लोग मानते हैं कि इसमें चंद्रमा के गुण आ जाते हैं। यह आस्था की बात है, कोई चिकित्सीय दावा नहीं।
ब्रज के मंदिरों में इस रात भजन-कीर्तन और विशेष सजावट होती है। घर पर भी चाँद के नीचे बैठकर कृष्ण नाम गाया जा सकता है।