ब्रज की होली: लट्ठमार से फूलों की होली तक
ब्रज में होली अलग क्यों है, कहाँ कौन सी होली होती है, और दूर से कैसे जुड़ें।
अपडेट: 25 Oct 2026
ब्रज में होली एक दिन का त्योहार नहीं है, यह लगभग एक महीने चलती है। कहते हैं कि वसंत पंचमी के बाद से ही मंदिरों में गुलाल उड़ने लगता है।
सबसे ज़्यादा चर्चा लट्ठमार होली की होती है, जो बरसाना और नंदगाँव में खेली जाती है। परंपरा के अनुसार नंदगाँव के पुरुष राधा जी के गाँव बरसाना आते हैं और वहाँ की महिलाएँ हँसी-ठिठोली में उन्हें लाठियों से दौड़ाती हैं। पुरुष ढाल से बचते हैं और गीत चलते रहते हैं।
वृंदावन के मंदिरों की होली भी अपनी तरह की है। कहीं फूलों की पंखुड़ियाँ उड़ाई जाती हैं, कहीं रंग और गुलाल। किस दिन क्या होगा, यह हर साल पंचांग और मंदिर की सूचना से तय होता है, इसलिए पहले कार्यक्रम पता कर लें।
एक व्यावहारिक बात
भीड़ बहुत होती है, रंग आँखों में जाता है और फ़ोन-कैमरा भीग सकते हैं। पहली बार जा रहे हों तो पुराने कपड़े पहनें और छोटा बैग रखें।
जो नहीं जा सकते, वे घर पर ठाकुर जी को थोड़े गुलाल और फूलों से सजा सकते हैं। वृंदावन का प्रसाद पूरे परिवार में बाँटना ही होली का असली आनंद है।